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आज़ाद पायल

अरे सुनिये न… पायल ने सोते हुए आज़ाद को प्यार से जगाते हुए कहा!

हां… आधी नींद से जगते हुए आज़ाद ने कहा।
पायल फंस गई है मेरी उसको निकाल दीजिये न प्लीज.. पायल ने दरवाजे के छोर पर फँसी पायल की ओर इशारा करते हुए कहा।
उफ़ ये लड़की भी न हमेशा लापरवाही का काम करती है… झुंझलाता हुआ आज़ाद बोला।
निकाल दीजिये न प्लीज्… पायल ने रिक्वेस्ट की।।

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हां ठीक है निकालता हूँ.. आज़ाद ने गुस्से में कहा।
और जैसे ही उसने दरवाजे के छोर में अटकी पायल को निकाली तुरंत ही पायल ने अपना पैर आगे कर उसे पहनाने का इशारा करने लगी और गुस्साए आज़ाद ने भी एक मुस्कान के साथ उसे पहना दिया।
आपके इस गुस्से में छुपे प्यार को देखने के लिए ही तो मैं ये करती हूँ.. पायल ने आज़ाद के गले लगते हुए कहा।
और मैं ये मुस्कान देखने के लिए ही हमेशा तुम्हारी ‘पायल आज़ाद’ कर देता हूँ.. आज़ाद ने मुस्कुराते हुए कहा।।

कलम से – अनुप्रिया

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