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सरकार अपने न्यूनतम खर्च उक्त से मिलो का कायाकल्प कर के पूर्वाचल मे कारोबार का अवसर ला सकती है

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लखनऊ | मऊ जनपद का परदहा काटन मिल,सहादतपुरा- स्वदेशी जयपुरीया काटन मिल(Cotton Mills) , दोनो पिछले बीसो बर्ष से बन्द पडा हुआ है , जिस पर जनप्रतिनिधियों और राजनैतिक पार्टीयो , मजदूर और राजनैतिक सामाजिक संगठनों ने बहुत बार आवाज उठाया ,परंतु सरकारों के आश्वासन के अलावा क्षेत्रीय लोगों को कुछ नही मिला, मजदूर संघठन अभी भी मुकदमे झेल रहे है |

क्षेत्र का मजदूर , बुनकर , किसान और नौजवान स्थानीय स्तर पर नेतृत्वहीन महसूस करने लगा है , उसके विस्वास और हूनर तथा जरुरतों को सबने “छला” है और… आज बेबस यूवाओ का एक बहुत बडा तबका बहुत दूर आजीविका महाराष्ट्र ,गुजरात दिल्ली ,पंजाब मे और गल्फ कंट्री मे जाकर… अपनी आजीविका तलाशता रहा है | बहुत बार यहाँ के बेरोजगार यूवा पासपोर्ट ,बीजा रोजगार के नाम पर धोखाधडी ,छल के शिकार होते रहे है !

करोना जैसी वैश्विक महामारी के कारण सामाजिक ,राजनैतिक , स्थानीय परिस्थितियां बदली है !

वर्तमान सरकार “पूर्वांचल” के मऊ जनपद को भी अपनी योजनाओं और कुटीर उद्योग,घरेलू कार्य सहित साडी उत्पादन और उसके प्रासेसिंग को ध्यान मे ले ,अपनी योजनाओं का हिस्सा बनाए तो ये तमाम लाकडाउन हो चूके …”मिलो”.. ,स्वदेशी काटन मील और,परदहां काटन मिल्क कायाकल्प होकर हजारों मजदूरों ,बेरोज़गारो को रोजगार का अवसर और अफनी बेहतरीन कशीदाकारी को प्रदर्शित करने का अवसर मील जाएगा |

सरकार अपने न्यूनतम खर्च उक्त से मिलो का कायाकल्प कारके ,उसके भूमि को उद्योगपतियो को “लीज” करके पूर्वाचल मे कारोबार का अवसर देकर और स्किल का पुरा उपयोग कर नया बहार ला सकती है |
सामाजिक , राजनैतिक ,व्यावसायिक कार्यकर्ताओ को , जनप्रतिनिधियों को इस ओर आवाज उठाने की जरुरत है ,और समय की मांग भी….एक अनुमान और धागा कारोबार विशेषज्ञों के अनुसार मात्र 2000 / करोड रूपये के समुचित इन्वेस्टमेन्ट के बाद सरकार तमाम आस- पास के क्षेत्रों के यूवाओ और मजदूरों को तथा पूर्वांचल को रोजगार से युक्त कर सकती है |

– त्रिवेणी प्रसाद

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