Home Aap ki Kalam श्रापित गुड़िया 2

श्रापित गुड़िया 2

cursed doll

The Cursed Doll Part :२

चाची ने रीना से पूछा तुम्हें ये गुड़िया कहां से मिली? तो वहीं रीना ने अनू से पूछा कि तुम्हें ये गुड़िया कहां से मिली? अनू ने कहा मां गुड़िया ने मुझे बताया कि आप उसे यहां लाईं थी…रीना को समझ में नहीं आया कि गुड़िया ने कैसे बताया…तभी चाची ने रीना का हाथ खींचते हुए दुबारा उससे पूछा कि तुम्हें ये गुड़िया कहां से मिली? तो रीना ने बताया कि कोई अनू के दूसरे जन्मदिन पर उसे गिफ्ट में दे गया था लेकिन पैकेट पर कोई नाम ना था…चाची डरते हुए बोली कि ये गुड़िया तो बिल्कुल वैसी ही है जो अम्मा की नातिन को मिली थी…रीना ने चाची को समझाया कि मार्केट में एक ही जैसी कई गुड़िया बनती हैं…लेकिन चाची को अब डर लगने लगा था…

दोपहर को सभी बच्चे बगल वाले बाग में खेल रहे थे अनू भी अपनी गुड़िया के साथ वहां पर बच्चों के साथ खेल रही थी तभी किसी बच्चे ने कहा कि वो अपनी गुड़िया को यहां से ले जाए नहीं तो वो उनके साथ नहीं खेलेंगे…बच्चों की बाते सुनकर अनू वहां से रोती हुई चली गई लेकिन थोड़ी ही देर में वो वापस आई और उस बच्चे को बगल वाले कुएं में ढकेल दिया जिसने उसके साथ खेलने से मना किया था…कुएं में छपाक की आवाज सुनते ही सारे बच्चों ने कुएं को घेर लिया और किसी बच्चे ने गांव में ये खबर आग की तरह फैला दी कि शहर वाली अनू ने बच्चे को कुएं में ढकेल दिया…सभी गांववाले कुएं के पास पहुंचे, आनन-फानन में कोई कुएं में कूदा फिर रस्सी के सहारे दोनों के बाहर खींचा गया…

ये कहो कि वो बच्चा बच गया नहीं तो अनर्थ ही हो जाता…

रोहित ने सभी गांव वालों से अनू की तरफ से माफी मांगी तो गांववालों ने कहा कि बच्चे हैं जानबूझकर थोड़ी किया होगा…तभी रीना अनू का हाथ खींचकर उसे घर ले गई और उससे पूछने लगी कि क्या ये सब उसने जानबूझकर किया था? तो अनू ने सिर हिलाकर हां में जवाब दिया और कहने लगी कि जब बच्चों ने उसके साथ खेलने से मना कर दिया तो वो गुड़िया के साथ घर आ रही थी लेकिन फिर गुड़िया ने कहा कि जो हमारे साथ खेलने से मना करे उसे कुएं में ढकेल दो और मैंने यही किया…अब तो रीना के शरीर में मानों खून ठंडा पड़ गया हो वो जमीन में धम्म से बैठ गई, बगल में खड़ी चाची भी अनू की बातें सुन रही थी तो उन्होंने अनू से कहा कि वो अपनी गुड़िया से पूछे कि क्या वो तुम्हें छोड़कर अपने घर वापस जाएगी जहां से वो आई थी?

अनू ने गुड़िया से पूछा फिर चाची को बताया कि गुड़िया बोल रही है कि वो सबकी जान ले लेगी अगर किसी ने भी उसे कहीं और भेजने की कोशिश की…गुड़िया की ये बात सुनकर तो अनू भी डर गई थी और फिर वो अपनी मां से जाकर चिपक गई और बोला मां मुझे नहीं रहना गुड़िया के साथ…रीना को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वो क्या करे तो उसने रोहित को ये बात बताई तो रोहित को यकीन नहीं हुआ और वो गुड़िया को कार में लेकर गांव के बाहर फैंकने निकल गया…

इससे पहले कि वो गुड़िया को कहीं फैंकता उसका एक्सीडेंट हो गया और जब उसकी आंखे खुली तो खुद को अस्पताल में पाया…ये तो कहो स्पीड कम थी नहीं तो जान बचाना मुश्किल हो जाता ये कहते हुए डॉक्टर कमरे से बाहर चला गया…तभी चाचा जी के साथ रीना कमरे में घुसी और रोते हुए पूछा कि ये सब कैसे हुआ…रोहित ने बताया कि वो गुड़िया को गांव से बाहर फैंकने लेकर जा रहा था लेकिन उसे लगा कि जैसे गुड़िया ने पीछे से उसका गला पकड़ लिया हो और खुद को बचाने के चक्कर में उसका एक्सीडेंट हो गया…लेकिन गुड़िया तो घर पर ही ये कहते हुए उसने चाची को फोन लगाया और पूछा कि अनू कहां है चाची ने कहा कि सो रही है…और गुड़िया?

नहीं खेलना गुड़िया के साथ

रीना ने डरते हुए पूछा तो चाची ने कहा बक्से में बंद करके ताला लगा दिया है…अब रोहित को भी रीना की बातों पर यकीन हो गया था…डॉकटर ने कुछ दवाईयां लिखकर रोहित को घर जाने की अनुमति दे दी…सबसे पहले घर आकर रोहित और रीना ने चाची से बक्से के बारे में पूछा और जब उसे खोला तो गुड़िया गायब थी…तभी अनू चिल्लाते हुए आई और बोली मां गुड़िया मुझे अपने साथ चलने के लिए बोल रही है मुझे नहीं जाना कहीं, मुझे नहीं खेलना गुड़िया के साथ ये बोलते हुए वो जोर-जोर से रोने लगी। चाची दौड़कर जुम्मन के यहां गईं तो पता चला कि जुम्मन कहीं बाहर गया है…श्रापित गुड़िया फिर से वापस आ गई है ये बात पूरे गांव में आग की तरह फैल गई थी…

गांव के सभी लोग रोहित के घर पर इक्ठ्ठा हो गए थे जिससे कि गुड़िया उन्हें नुकसान ना पहुंचा सके…किसी ने कहा कि गुड़िया को जला दो श्राप भी खत्म हो जाएगा तभी जुम्मन भी आ गया और बोला कि आग से इसका श्राप नहीं जाएगा बल्कि ये और शक्तिशाली हो जाएगी…तो किसी ने कहा कि पिछली बार की तरह इस बार भी इसे कहीं फैंक आओ तो रोहित बोला कि मैंने कोशिश की तो मेरा एक्सीडेंट हो गया हमें हमेशा के लिए इस गुड़िया से छुटकारा पाना होगा… जुम्मन ने कहा कि पास के ही गांव में एक झाड़-फूंक करने वाले फकीर रहते हैं, सुना है कि कई जिन्नों को तो उन्होंने कैद करके रखा है वो ही अब कुछ कर सकते हैं…तो उन्हें बुलाकर ले आओ रोहित के चाचा ने कहा…

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तो जुम्मन बोला बहुत उम्र हो गई है तो अब वो चल फिर नहीं पाते हमें ही गुड़िया लेकर उनके पास चलना पड़ेगा…अब सवाल था कि गुड़िया को उन तक कैसे लेकर चले क्योंकि उसकी शक्तियों का अंदाजा सभी को था…चाची ने कहा कि अनू गुड़िया को अपने साथ ले जा सकती है…रात हो चली थी अनू अपनी गोद में गुड़िया को लिए बगल वाले गांव में चल दिए गांववालों ने अनू को घेर रखा था…गुड़िया को शायद पता चल चुका था कि ये लोग उसे कहां ले जा रहे हैं तो उसने अनू को अपने बस में कर लिया जिसके बाद अनू भागने चिलाकर इधर-इधर भागने लगी…आसमान में घनघोर काले बादल, तेज आंधी और चमकती बिजली जैसे गांववालों को रोकने की कोशिश कर रही हो…

जुम्मन समझ चुका था कि ये सब बुरी शक्तियां हैं जो उन्हें रोक रही हैं…जुम्मन ने एक कपड़ा लिया और उर्दू में कुछ पढ़कर उस कपड़े में गुड़िया को लपेट दिया जिसके बाद अनू थोड़ा सा शांत हुई… बारिश और आंधी की वजह से लालटेन भी बुझ गए थे जिसकी वजह से हर तरफ बस अंधेरा ही नजर आ रहा था…इन सभी परेशानियों से जूझते हुए सभी लोग फकीर के पास पहुंचे, खटिए पर पड़े हुए फकीर बहुत ही कमजोर दिख रहे थे…गुड़िया को देखते ही वो सारी बात समझ गए…उन्होंने कहा कि शायद इसी दिन के लिए अल्लाह ने उन्हें अबतक जिन्दा रखा है…जुम्मन ने जैसे ही फकीर के हाथों में गुड़िया देनी चाही तो उसे ऐसा लगा कि कोई उसका गला दबा रहा हो…

जुम्मन छटपटाने लगा जिससे गुड़िया उसके हाथ से नीचे गिर गई तभी अनू ने लपक कर उसे उठा लिया और बाबा को दे दिया…बाबा के हाथों में जाते ही गुड़िया में से डरावनी और रोने की आवाज निकलने लगी आवाज इतनी तेज थी कि मानों कान से खून निकाल दे, सभी ने अपने कान बंद कर लिए और अनू भी जोर-जोर से रोने लगी…फकीर ने गुड़िया के कान में कुछ कहा जिसके बाद वो शांत हो गई…फकीर ने कहा कि ये गुड़िया तभी श्राप मुक्त होगी जब इसकी रूह को कोई खुद अपने साथ अल्लाह के पास लेकर जाए…

शायद इसीलिए मैं अभी तक मरा नहीं हूं इतना कहने के बाद फकीर ने फिर गुड़िया के कानों में कुछ बुदबुदाना शुरू किया जिससे मानों गुड़िया में जान आ गई हो वो इंसानों की तरह छटपटाने लगी और फकीर की चुंगल से छूटने की कोशिश करने लगी, फकीर लगातार गुड़िया के कानों में कुछ बोले जा रहा था और एक समय ऐसा आया कि फकीर और गुड़िया बिल्कुल शांत हो गए क्योंकि शायद अब दोनों में जान ही नहीं थी…फकीर की सांसों के साथ-साथ तूफान भी थम गया…थोड़ी ही देर में आसमान में तारे साफ-साफ दिखाई देने लगे…गांव के सभी लोग पूरी रात वहीं फकीर के पास ही रुके रहे और सुबह होते ही उसके जनाजे की तैयारी करने लगे…फकीर के जनाजे में पूरा गांव शामिल हुआ और फकीर के साथ ही उस श्रापित गुड़िया को भी दफना दिया गया।

Writer: Akanksha Singh

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