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कितना खतरनाक हो सकता है टिड्डियों का हमला ,कहीं प्रलय का संकेत तो नहीं?

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टिड्डी दल
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लखनऊ | अफ्रीका से अरब और अरब से ईरान, पाकिस्तान और फिर भारत में टिड्डियों ने हमला किया है जिसके चलते किसानों की करोड़ों की नष्ट हो गई है। इस फसल के नष्ट होने से आने वाले समय में खाद्यान की कमी होगी और महंगाई बढ़ेगी। टिड्डी दल में कम से कम 10 लाख से ज्यादा टिड्डियां होती हैं। एक के पीछे एक करके कई टिड्डी दल समयांतर में हमला करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से इन टिड्डियों ने हमला किया है उससे देश में करोड़ों रुपए के कीमत की मूंग दाल और अन्य फसलों के नुकसान होने का खतरा मंडरा रहा है। ये टिड्डी दल जिस इलाके से गुजर जा रहे हैं वहां के खेतों में फसलें गायब हो जाती हैं। साल 2019 में भी टिड्डियों ने देश में बहुत नुकसान पहुंचाया था। साल 1993 में टिड्डियों का सबसे बड़ा हमला हुआ था।

मानसून आने से पहले टिड्डी दल के अंडे पूरी तरह खत्म करने होंगे

कोरोना की तरह प्रदेश के हर जिले में अब टिड्डी दल भी अपने पांव पसारता जा रहा है। टिड्डी दलों ने अब तक राजस्थान के कई जिलों में अपना असर दिखाया है और अब टिड्डियों का प्रकोप कोटा में भी देखने को मिला है। कोटा में दादाबाड़ी, रावतभाटा रोड, वल्लभनगर, एरोड्राम, नयापुरा समेत कई जगहों पर टिड्डी दल के हमले की खबर सामने आई है।

कृषि विभाग के अधिकारियों को कहना है कि प्रदेश में मानसून आने से पहले टिड्डी दल के अंडे पूरी तरह खत्म करने होंगे। नहीं तो यह बड़ी समस्या होगी। क्योंकि मानसून के बाद किसान खेतों में फसल बोना शुरू कर देगा और टिड्डी दल के हमले उन्हें नष्ट कर देंगे। टिड्डी दलों को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि जहां इनका ब्रिडिंग सेंटर है वहीं पर गहरा गढ्ढा खोदकर इनके अंडे को दबा दिया जाए तो यह नहीं पनपेगी। माना जाता है कि एक वयस्क मादा टिड्डी अपने तीन महीने के जीवन चक्र में तीन बार में करीब 90 अंडे देती है। ऐसे में अगर यह अंडे नष्ट नहीं हुए तो एक झुंड में 4 से 8 करोड़ तक टिड्डियां प्रति वर्ग किलोमीटर में पैदा हो जाएगी।

एक दिन में 35 हजार लोगों का खाना हजम : दुनियाभर में टिड्डियों की 10 हजार से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन भारत में केवल चार प्रजाति ही मिलती हैं। इसमें रेगिस्तानी टिड्डा, प्रवाजक टिड्डा, बंबई टिड्डा और पेड़ वाला टिड्डा शामिल हैं। इनमें रेगिस्तानी टिड्डों को सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। ये टिड्डियां एक दिन में 35 हजार लोगों का खाना चट कर जाती है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, रेगिस्तानी टिड्डों की वजह से दुनिया की दस फीसद आबादी का जीवन प्रभावित हुआ है।

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