Home Aap ki Kalam 2014 में बिहार की जनता मौन थी, 2019 में मुर्दा हो...

2014 में बिहार की जनता मौन थी, 2019 में मुर्दा हो चुकी है

आदर्श कुमार

देश में जो भी बड़े आंदोलन हुए हैं, सत्ता के खिलाफ. उसकी शुरुआत बिहार से ही हुई है. अंग्रेजो के खिलाफ महात्मा गांधी हो या इंदिरा के खिलाफ जेपी, सबने बिहार को ही चुना. लेकिन अब इस क्रांतिकारी धरती में सत्ता से सवाल करने की हिम्मत नहीं रही. किसी मुद्दे पर बात या प्रदर्शन करने के लिए अब बिहार कि धरती हिन्दू मुस्लिम वाला एंगल खोजती है. इसके साथ वो मुद्दा सत्ता के पक्ष में भी होना चाहिए.

ये सच है और आप इसको झुठला नहीं सकते. अगर आप उन मासूमों के लिए लिखते हैं. तो लोग आप पर सवाल उठा देंगे कि आप लिखने के अलावा उनके लिए क्या कर रहे हैं? आप केवल सत्ता को कठघरे में खड़ा नहीं कर सकते. गौर करने वाली बात ये है, कि ये वहां के जनता के बोल हैं. जिन्होंने लोकसभा में 40 में से 39 सीटें एनडीए को दी है.

2014 में भी ऐसे ही बच्चों की मौत हुई थी. उस समय भी डॉ- हर्षवर्धन स्वास्थ मंत्री थे. 2019 में भी वही हर्षवर्धन स्वास्थ मंत्री हैं. बच्चे तब भी मरे थे और आज भी मर रहे हैं. इन सब के बीच एक बड़ा बदलाव हुआ है, वो ये की..

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