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माँ का प्यार

“माँ उठो न माँ देखो न आपकी कशिश आयी है आपके पास उठो न माँ” 5 साल की कशिश अपनी माँ को उठाते हुए बोली।

पर माँ कहाँ उठने वाली थी वो तो जा चुकी थी न उससे दूर बहुत दूर अस्पताल के बेड पर लगभग उनको अभी एक साल गुजारना था। तीन महीने पहले एक एक्सीडेंट में उनके सिर पर चोट लग गयी थी जिससे वो कोमा में थीं।।

“कशिश माँ को तंग मत करो बेटा उनको आराम करने दो!” पीछे से आते हुए पापा ने कहा।।

“पर पापा माँ को क्या हुआ है? उनको बोलो न उठने को। मुझे उनसे कहानी सुननी है वो राजकुमार और परी वाली। मुझे तो उन्ही के हाथ से खाना खाना है न। और पापा, मम्मी

को कितनी ही बातें बतानी है जो दादी कहती हैं मुझसे और मृनल भइया की भी तो शिकायत करनी है।” कशिश ने माँ का हाथ पकड़ कर बड़ी ही मासूमियत से कहा।

“अच्छा सुनो मैं बाजार जा रहा हूँ बताओ क्या क्या लाना है तुम्हारे लिए! वो झुमके ले आऊं क्या जो तुम्हे उस दिन बाजार में पसंद आये थे अरे वही खुनखुन जी ज्वैलर्स वाले के यहाँ जो देखी थी। तुम छोड़ो मैं खुद ही ले जाऊंगा मत बोलो तुम हुँह।” गुस्से में पापा ने कहा।

“हां पापा और वो पायल भी ले आना पापा जो माँ ने मेरे लिए लिए थे उस दिन।”कशिश ने पीछे से कहा। “हां बेटा जरूर ले आऊंगा क्योंकि तुम्हारी माँ तो एकदम लापरवाह हैं। तीन महीने से यहीं पर लेटी हैं न बच्चों की चिंता है न ही मेरी!” पापा ने आगे कहा।

माँ। माँ की आँखों से आंसू बह निकले। वो भले ही बोल नहीं सकती थीं पर सब कुछ देख और सुन सकती थीं। उनका मन था कि उठें और भींच कर अपनी कशिश को गले लगा लें। और बोलें “तू इतनी मीठी मीठी बातें कैसे कर लेती है रे! कुछ दिन इस मुए चारपाई पर आराम भी न करने दिया।।

पर माँ तो बेबस थी लाचार थी अपने दिमाग के आगे और अपनी बेचारगी हार के आगे।।

“नहीं तुम्हें उठना होगा अपनी बच्ची के लिए अपने पति के लिए।। तू नहीं उठी तो इन लोग का क्या होगा तेरे बिना इनका है ही कौन।

तेरे ही आसरे हैं ये लोग। उठ प्रणाली उठ। तुझे उठना ही होगा उठ” माँ ने खुद से कहा।।

भरसक प्रयास करने के बाद भी वो सफल नहीं हो पाई। फिर अचानक न जाने कैसे इतनी ताकत आ गयी उस कमजोर सुखे से शरीर में की एक झटके में वो उठ गई।।

“माँ! माँ! तुम उठ गई माँ देखो न मृनल भैया ने कितना मारा था परसों।।” कशिश ने अपना हाथ दिखाते हुए कहा। “और माँ पता है उन्होंने डांटा भी था बोल रहे थे की आप कभी नहीं आओगे! माँ मृनल भइया गंदे हैं माँ बहुत गंदे हैं!” माँ को उठते देख कशिश ने रोते हुए शिकायत शुरू कर दी।

“चुप हो जा मेरी बच्ची अब तुझे कोई नहीं छू सकेगा तेरी माँ आ गयी है न चुप हो जा अब मेरा बच्चा!” पूरे तीन महीने बाद अपनी बेटी को गले लगाकर प्यार करते हुए माँ ने कहा।।

अपने सारे दर्द को भूल कशिश ने भी माँ को गले लगा लिया।।

लेखिका – अनुप्रिया

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