Home Aap ki Kalam मुख़्तसर ज़िन्दगी १

मुख़्तसर ज़िन्दगी १

बात उन दिनों की है जब टेलीफोन या मोबाइल नहीं हुआ करते थे। लोग चिट्ठियों का प्रयोग किया करते थे। उन्हीं दिनों में काजल की मुलाकात प्रेम से हुई। प्रेम उसके घर के बगल वाले घर में किरायेदार था। स्नातक करने के लिए इलाहाबाद के नैनी से बनारस आया था और वहीं की खूबसूरती या यूँ कहें कि काजल की खूबसूरती में इतना खो गया था कि सब जग वो भूल चुका था।

धीरे धीरे काजल भी उसकी तरफ खिंचने लगी। प्रेम और काजल धीरे धीरे एक दूसरे को चाहने लगे थे। इज़हार नहीं कर सकते थे क्योंकि डरते थे दुनिया वालों से। उनकी नज़रों से बचना तो वैसे भी नामुमकिन ही था।


एक दिन काजल अपने छत पर खड़ी बाल को सूखा रही थी और मंत्रमुग्ध हो हिम्मत जुटा कर प्रेम ने काजल से बोल दिया “गंगा घाट पर मिलना शाम 4 बजे।” और फिर वहां से चला गया
पहले तो काजल घबरा गई क्योंकि ये सब नया नया था इसके लिए। कुछ समझ न पा रही थी क्या करे क्या नहीं।


इसी उधेड़बुन में वो अपने कमरे में वापस आयी और सोचने लगी कि शाम को क्या पहने और “उससे बात कैसे करेगी? अगर किसी ने देख लिया तो?? अगर भइया ने देख लिया तो हे भगवान! तब क्या होगा।” इसी तरह के सवालों को सोचते हुए उसने एक गुलाबी रंग का सूट निकाला जिस पर उसने छोटे वाले झुमके पहनने को निकाला और इंतज़ार करने लगी 4 बजने का।

मरता क्या न करता

साढ़े तीन बजते ही वो तैयार हुई और तुरंत नीचे आकर अपनी माँ को बताया “माँ मैं दोस्तों के साथ गंगा घाट जा रही 6 बजे तक लौट आऊंगी।” कहकर वो वहां से चली गयी।
गंगा घाट पहुँच कर देखा तो प्रेम पहले से ही उसका वहां इंतज़ार कर रहा था। उसको देख कर वो घबरा गई लेकिन मरता क्या न करता।

धीरे धीरे उसने अपने कदम उसकी तरफ बढ़ाये।
“प्रेम!” काजल ने हौले से कहा।
“मुझे पता था काजल तुम ज़रूर आओगी। देखो न मैं तुमसे पहले ही आ गया।। काजल कुछ बातें करनी थी तुमसे।” उसकी तरफ देखते हुए प्रेम ने कहा।
“हाँ कहिये न क्या कहना है?” काजल ने उसकी आँखों में झांकते हुए कहा।


“काजल पता नहीं क्यों इन दिनों मैं तुम में इतना खो गया हूँ कि खुद को ही भूल बैठा हूँ। पता नहीं क्या हो गया है मुझे। बस दिल चाहता है कि तुम्हें ही शाम-ओ-सुबह देखता रहूं। पता है आज तक मैंने किसी लड़की की तरफ नहीं देखा पर तुम्हें देखते ही ऐसा महसूस हुआ कि शायद तुम्हीं हो जिसकी खूबसूरती की चर्चा पूरी दुनिया में है पर बदनाम न हो जाओ तुम इसीलिए उसे बनारस का नाम दे दिया गया।। काजल तुम्हें पता है जब भी तुम्हें सोचता हूँ तो लगता है जैसे… जैसे किसी दूसरी दुनिया में ही खो गया हूँ मैं।। आई लव यू काजल। आई लव यू सो मच।।” अपने दिल की बात को ज़ाहिर करते हुए भावुक सा हुआ प्रेम बोला।

इतनी सारी मोहब्बत

“इतनी सारी बातें इतनी सारी मोहब्बत वो भी मेरे लिए। प्रेम मैं इस काबिल नहीं हूँ शायद। मत कीजिये इतना प्यार कहीं ऐसा न हो कि आप बाद में आपको पछताना पड़े।” काजल ने चिंता जताते हुए कहा।

“नहीं काजल ऐसा नहीं होगा। मुझे पता है मेरे लिए तुमसे योग्य कोई नहीं है। क्योंकि तुम एक बेहतरीन इंसान हो जो लोगों की परवाह करती है खुद का न सोच दूसरों का भला करती है भला ऐसी लड़की से कोई क्यों नहीं प्यार करेगा।। काजल मत सोचो ज्यादा बस जो दिल में है बोल दो। बोलो काजल बोलो।” प्रेम ने उसे उत्साहित करते हुए कहा।।


“हाँ प्रेम मैं आपसे बहुत प्रेम करती हूँ। शायद दीन दुनिया से डर के कुछ नहीं बोल रही थी पर अब बस और नहीं।। आई लव यू टू प्रेम।” काजल उसको गले लगाते हुए बोली। “काजल तुम्हें कुछ बताना था।” प्रेम ने उसे सामने लाते हुए कहा।।”हाँ कहिये न।” काजल ने प्रेम की आँखों में झांकते हुए कहा….

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