Home Aap ki Kalam उन्मुक्त इश्क़

उन्मुक्त इश्क़

मैं तेनु समझावा कि न तेरे बिना लगदा जी, तू की जाने प्यार मेरा…

मधुमिता यही गाना गुनगुना रही थी कि उसे “तू नज़्म नज़्म सा मेरे आँखों में ठहर जा मैं ख्वाब ख्वाब सा…” गाना सुनाई दिया। अरे मीता तुम.. तुम कब आयी ? मधुमिता उसे गले लगाते हुए पूछा।

“बस अभी अभी जब आप हमें याद करते हुए अपना फेवरेट गाना गा रही थीं… और बताओ क्या चल रहा है?”

मीता मधु से अलग होते हुए बोली।”क्या बताऊँ यार थक गयी हूँ दुनिया को समझा समझा कर कि नहीं रहना है उनके अनुसार मेरी अपनी जीवनी है मेरी अपनी पसंद है।” मधु उदास होते हुए बोली।

“मुझे पता है तुझे उस लड़के से शादी नहीं करनी। कोई और पसन्द है तो बोल मैं हेल्प करूंगी तेरी दुनिया को समझाने में।”

मीता उसे समझाते हुए बोली।”यार कितना अजीब है न सब कुछ तू उस चीज़ के लिए दुनिया को समझाने चली है जो मुमकिन ही नहीं।

तुझे क्या लगता है मेरा किसी लड़के पर क्रश है या किसी लड़के से प्यार है? नहीं डिअर मुझे तुमसे प्यार है। ये जो दिल धड़क रहा है सीने में उस में तुम्हारा नाम है।

आज तक कभी तुमसे बोला नहीं या ये कहो बोलने की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि तुम मेरी तरह नहीं हो।

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तुम नॉर्मल इंसान हो बाकियों की तरह।

और शायद आज के बाद में तुम्हें खो भी दूँ। पर सच यही है।”

मधु ने मीता के आँखों में झांकते हुए कहा।”मधु तू पागल है क्या तुझे क्यों ऐसा लगता है कि मैं तुझे छोड़ कर जाऊंगी? गधी जो तू फील करती है

सेम मैं भी फील करती हूँ तेरे लिए। तेरी ही कैटेगरी में हूँ पर तुझसे कभी कहा नहीं डर की वजह से।” मीता ने अपना हाल बताते हुए कहा।

“डर! क्या हम जैसे लोग डर डर कर और लोगों से शर्मिंदा होने के लिये ही बने हैं?” मधु ने मीता का हाथ थामते हुए पूछा।

“शायद नहीं! अब हम नई डेफिनेशन लिखेंगे अपने जैसे लोगो की।” मीता ने कहा।”लेकिन कैसे ?”  मधु ने परेशान होते हुए सवाल किया।

“सोचने में वक़्त क्यों ज़ाया करें..हमारी कहानी में हमारी जीत हो या न हो मगर हमारी कहानी खूबसूरत ज़रूर होगी।”

ये कहते हुए मीता ने मधुमिता को ज़ोर से गले लगा लिया ..कभी न अलग होने के लिये।

कलम से :अनुप्रिया

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