Home Aap ki Kalam मुख़्तसर ज़िन्दगी २

मुख़्तसर ज़िन्दगी २

लव स्टोरी पार्ट

“व्.. व्.. वो मैं…” हाँ बोलिये न।” काजल ने प्रेम की बातों को काटते हुए कहा।।
“वो काजल मैं अगले महीने नैनी जा रहा हूँ हमेशा के लिए। मेरी स्नातक की पढाई ख़त्म हो रही है तो घर से भी चिट्टी आ रही है। पर मैं वादा करता हूँ वहाँ जाकर माँ पापा से हमारे रिश्ते की बात करूंगा। और तुम्हें खत भी लिखा करूँगा।। तुम उसका उत्तर दोगी न बोलो दोगी न?” प्रेम ने मन की बात बोलते हुए पूछा।

“हाँ हाँ ज़रूर दूंगी आप बस वहां जाकर मुझे भूल मत जाईयेगा।” काजल उदास होते हुए बोली।
“नहीं कभी नहीं।” काजल को प्रेम गले लगाते हुए बोला।
“अच्छा चलो अब घर चलते हैं माँ परेशान हो रही होंगी।” काजल ने घर की ओर मुड़ते हुए कहा।
“अच्छा सुनो रात को छत पर आना तुम्हें देख कर सोने की आदत हो गयी है।” प्रेम ने साथ चलते हुए कहा।

“ज़रूर।” मुस्कुराते हुए काजल ने कहा।

ऐसे ही मिलते जुलते बात करते एक महीना बीत गया।।और प्रेम के वापस जाने का वक़्त आ गया। अब दोनों ही उदास थे, होते भी क्यों न आखिर दोनों एक दूसरे को आखिरी बार देख रहे थे इसके बाद न जाने कब मिलने का मौका मिले।।

प्रेम अपने घर नैनी पहुँच गया। पर सवाल ये था कि वो काजल को अपनी खैरियत दे तो कैसे। उस वक़्त फ़ोन का जमाना तो था नहीं तो बस उसने उठाई चिट्ठी और लिख डाला खत काजल के नाम का।

प्रिय काजल, उम्मीद है कि तुम खैरियत से हो। मैं भी खैरियत से यहाँ पहुँच गया बस तुम्हारी याद आती है हर वक़्त। लगता है जैसे जिस्म से जान को अलग कर दिया गया हो। तुम परेशान मत होना मैं जल्द ही डोली लेकर आऊंगा और तुम्हें यहीं अपने पास ले आऊंगा। खत का जवाब जरूर देना वरना मुझे लगेगा कि तुम नाराज़ हो।।
तुम्हारे खत के इंतज़ार में।

तुम्हारा प्रेम।।


खत मिलते ही मानो काजल दूसरी दुनिया में ही उड़ गई हो। उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब उसने भी पेपर पेन उठाया और बस शुरू हो गयी।

प्रिय प्रेम,
खत मिला तुम्हारा सुनकर अच्छा लगा कि तुम ठीक हो। यहाँ मेरा भी वही हाल है रोज़ छत पर जाती हूँ तो ये लगता है कि तुम अभी बाहर आओगे और कहोगे “कितना खूबसूरत लग रहा है न “बनारस”।” पर ऐसा नहीं होता है तो मन उदास हो जाता है। जल्दी ही आना मुझे ले जाने के लिए क्योंकि अब माँ और भाई भी मेरे लिए लड़का देख रहे हैं। और बात हो रही है मेरी शादी की।।
तुम्हें मेरा खूब सारा प्यार।

तुम्हारी काजल।।

ऐसे करते करते 6 महीने बीत गए। आखिर कर बकरी अपनी कब तक खैर मनाएगी पड़ ही गयी चिट्ठी भाई के हाथ।
“कौन है वो लड़का बुलाओ उसे यहाँ पर” भाई ने गुस्से में कहा।
“भाइया वो नैनी में रहता है और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। अपने घर के बगल वाले घर में जो प्रेम रहता था न वही है।” डरते डरते काजल ने सब बता दिया।


“अच्छा तो बुलाओ उसे घर पर हमें भी देखना है उसे” माँ ने नम्र स्वर में कहा।
“ठीक है तो मैं खत लिख कर बुलाता हूँ उसे और उसके माँ बाप को भी। लड़का पसंद आया तो लगे हाथ शादी की भी बात कर लेंगे। वैसे बात चीत में तो अच्छा था वो तो पढ़ने में भी होशियार था। स्नातक में उसका नम्बर काफी अच्छा आया था गुरु जी बता रहे थे।” भाई ने बताया।


भाई ने फिर खत लिख कर उसे आने को कहा। कुछ दिन बाद जब खत का उत्तर आया तो उस में लिखा था “भइया अभी माँ बाबूजी नहीं आ सकते। गेहूँ काटने का वक़्त आ गया है तो वो बाद में आकर मिल लेंगे। आप कहें तो सिर्फ हम आ जाएं?””ठीक है तुम ही आ जाओ। बाकि बात हम घर आकर तुम्हारे पिता जी से कर लेंगे” भइया ने उत्तर दिया।


कुछ दिन बाद खत मिलते ही प्रेम वहां से बनारस के लिए रवाना हो गया।
पर जिस ट्रैन से वो आ रहा था वो दुर्घटनाग्रस्त हो गयी और और प्रेम की मौत हो गयी।।

ये खबर जब अख़बार के द्वारा काजल तक पहुँची तो उसे सदमा लग गया और वो पागलसी हो गयी थी। उसका इलाज मुमकिन न हुआ और उसकी भी मौत हो गयी।
और इस तरह से वो इस दुनिया में न सही दूसरी दुनिया में मिल ही गये।।

लेखिका -अनुप्रिया

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