Home Aap ki Kalam परे हूँ मैं

परे हूँ मैं

परे हूँ मैं।
हर चीज़ से हर सोच से।

परे हूँ मैं।
तेरी दुनिया से तेरी नृशंसता से।

परे हूँ मैं।
तेरे बनाये घेरे से तेरे बनाये अपनत्व से।

परे हूँ मैं।
खुद की भावना से खुद के भेद से।

परे हूँ मैं।
तेरे दिए दर्द से तेरे दिए चेतावनी से।

परे हूँ मैं।
अपनी बेदर्दी से अपनी बेबाकी से।

परे हूँ मैं।
तेरे गुफ्तगू से तेरे बातों से।

परे हूँ मैं।
इस बेबाक आवारगी से इस खटकती दीवानगी से।

परे हूँ मैं।
अपनी ही कल्पना से अपने ही सपनों से।

परे हूँ मैं।
इन सब नादानियों से।

परे हूँ मैं।
तेरी हर झल्लाहटों से।

इन सब से परे हूँ मैं।

कलम से -अनुप्रिया

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