Home Aap ki Kalam सेंध

सेंध

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yodhya

वो बहुत पराक्रमी था

शायद राजा से भी ज्यादा

पर आज वह हारना चाहता था

राजा के हाथों मरना चाहता था

राज्य तो उसे मिलने वाला न था

किन्तु मरकर राजा के दीवार पर

अपना सिर टंगा देखना चाहता था

सेंध लगाने के लिए उसने

आज अपना सिर गवां दिया

कालांतर में यही उसके

अनुयायियों को प्रेरणा देगा कि

अब अगला कदम उन्हें उठाना है

कि सेंध तो लग चुकी थी।

Writer : साहित्यसेवी सत्येन्द्र सिंह 

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