Home Desh Delhi AIIMS :24 घंटे की सर्जरी में जुड़वां बहनों को किया अलग

Delhi AIIMS :24 घंटे की सर्जरी में जुड़वां बहनों को किया अलग

251
1
opd
google

नई दिल्ली |दिल्ली एम्स (Delhi AIIMS) के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सीय जगत में नया रिकॉर्ड कायम किया है. 64 डॉक्टरों(doctors) की टीम ने 24 घंटे तक चली मैराथन सर्जरी(Surgery ) के बाद दो जुड़वां बहनों को अलग करने में कामयाबी हासिल की है. दोनों बहनें कूल्हे से आपस में जुड़ी थीं. इनकी रीढ़ की हड्डी और पैरों की नसों के साथ आंत भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी. शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे शुरू हुई सर्जरी शनिवार सुबह 9 बजे तक चली. फिलहाल दोनों बहनें वेंटिलेटर पर हैं. डॉक्टरों का कहना है कि बच्चियों की हालत नाजुक बनी हुई है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि दोनों बच्चियां जल्द स्वस्थ हो जाएंगी. इससे पहले दिल्ली एम्स के डॉक्टर सिर से जुड़े जग्गा और बलिया को अलग करने में कामयाब हुए थे.

डेढ़ साल से एम्स में भर्ती दो वर्षीय बच्चियाँ

दो वर्षीय जुड़वां बच्ची बीते डेढ़ साल से एम्स में भर्ती हैं.
यूपी के बदायूं जिला निवासी यह बच्चियां शारीरिक तौर पर जटिल ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं थीं. इसलिए डॉक्टरों को सर्जरी के लिए एक लंबा वक्त लगा. साथ ही कम आयु में एनेस्थीसिया भी नहीं दिया जा सकता. ऐसे में डॉक्टरों को इनके मजबूत होने का इंतजार था. 3डी मॉडल पर एक लंबी प्रैक्टिस के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन की योजना बनाई और कोविड महामारी के इस वक्त एकजुट होकर बच्चियों को नई जिंदगी देने का प्रयास शुरू किया. शुक्रवार को यह ऑपरेशन शुरू हुआ, जो शनिवार सुबह पूरा हो सका. एम्स के बालरोग सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मीनू वाजपेयी ने ऑपरेशन सफल होने की जानकारी देते हुए फिलहाल दोनों बच्चियों के निगरानी में रहने की बात कही.

डॉक्टरों की टीम

एम्स के पीडिएट्रिक्स सर्जरी, एनेस्थीसिया, पीडिएट्रिक्स कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी, सीटीवीएस के अलावा रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्स व अन्य स्टाफ समेत 64 से ज्यादा लोगों की टीम ऑपरेशन में जुटी रही. तीन अलग-अलग टीमें आठ-आठ घंटे की शिफ्ट के लिए तैयार की गईं, लेकिन ऑपरेशन के दौरान सभी को एक साथ रहना पड़ा.

मेडिकल टीम को सबसे बड़ी चुनौती

ऑपरेशन में व्यस्त मेडिकल टीम को सबसे बड़ी चुनौती का सामना तब करना पड़ा जब दोनों बच्चियों का कूल्हा और पेट से जुड़ाव होने के अलावा उनकी रीढ़ की हड्डी और आंत आपस में जुड़े थे. पैरों की नसें दोनों की एक ही थीं, जिसकी वजह से नई नसें प्रत्यारोपित करना जरूरी हो गया. रक्त संचार भी जरूरी था. ऐसे में नई नस को एहतियात के साथ प्रत्यारोपित किया गया. अलग करने के बाद एक बच्ची को नई त्वचा देना भी चुनौती था. बच्ची की मां से टिश्यू लेकर प्रत्यारोपित किए गए. कार्य को सकुशल निष्पादित करने में संस्थान के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ देवेंद्र जी की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है,जिनके अथक प्रयास से इस कोरोना महामारी के समय मे भी सभी कुशल चिकित्सको ने मानवता का परिचय देते हुए सफल सर्जरी करके दोनों बच्चो को अलग किया.

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here