Home Aap ki Kalam तशव्वुर: मेरी वफ़ा को बदनाम कर रहे हो

तशव्वुर: मेरी वफ़ा को बदनाम कर रहे हो

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मेरी तशव्वुर का इम्तिहान ले रहे हो,
मेरी वफ़ा को बदनाम कर रहे हो।
यह मुझे तुम किस खता की सजा दे रहे हो,
मेरी वफ़ा को इल्जाम दे रहे हो।
मेरा हर वक्त है तुझ पर निसार,
मैंने दुआओं में मांगी है तेरे लिए खुशियां बेशुमार।

हर लम्हा सजाया है देकर अपना चैनो करार,
ऐ चांद नूरानी चेहरे तुझसे मिलने को मेरी बाहे बेकरार।
अब मेरी इल्तजा पर तुम गौर करो,
मुझे यूं ना तुम बेसब्र करो।
मेरे दिल की धड़कन बढ़ा रही हो,
इस बेरुखी से हर पल मुझे तुम नए जख्म का एहसास दे रही हो।
मेरी सब्र का इम्तिहान ले रहे हो, मेरी वफ़ा को बदनाम कर रहे हो ।1।

तेरे दीदार नहीं मुझको है सपने दिखाए,
मेरे सूनी रातों में तूने ही ख्वाबों के हैं दीप जलाए।

मेरे नींदों में है तूने रंग रंग के फूल खिलाए ।
उन फूलों की कसम मैं नहीं हूं बेरहम।
है शिकवा जो तुझे हवाओं ने किया,
वह मेरे मोहब्बत का ले रहे हैं इंतहा।
बेखबर तुम मुझको दे रहे हो सजा,
फिर भी मुझको पसंद है तेरी यह अदा।
मेरी वफ़ा को बदनाम कर रहे हो,
मेरी तशव्वुर का इम्तिहान ले रहे हो।2।

ऐ दिलरुबा मेरा दिल तो है तुझ पर फिदा,
तू मुझ से मरने से भी नहीं होगी जुदा।
मेरी सांसों में होगी तेरे लिए दुआ,
होठों पर तेरी रजा। तू मेरी सुबह है शाम है,


मेरी जिंदगी का महताब है तू,
मकसद है मन्नत है तू।
मेरे ख्वाबों की जन्नत है तू।
तेरे हां के खातिर सांसे भर रहा हूं,
हर पल तेरे ना की डर से घुट रहा हूं।


यह सच है कि तुम मुझसे प्यार कर रहे हो,
फिर क्यों शक कर रहे हो।
मेरी वफ़ा को बदनाम कर रहे हो,
मेरी तशव्वुर का इम्तिहान ले रहे हो।3।

✏श्रीनिवास द्विवेदी।

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